Mannat 26 March 2025 Written Update – Vikrant doesn’t let Mannat leave

विक्रांत और मन्नत: एक दोस्ती जो हर मुश्किल से लड़ती है

इस Mannat 26 March 2025 Written Update में एक भावनात्मक और तनाव भरी कहानी सामने आती है, जिसमें गरीबी, सम्मान, दोस्ती और परिवार के रिश्तों की गहराई को दिखाया गया है। कहानी की शुरुआत होती है जब मन्नत को अपनी माँ की तस्वीर के सामने रोते हुए देखा जाता है। वह अपनी माँ से कहती है कि वह कमजोर नहीं है, लेकिन हालात ऐसे हैं कि सिर्फ उसका ही नहीं, बल्कि उसकी माँ की परवरिश का भी अपमान हुआ है। मन्नत गरीबी के बावजूद अपने आत्मसम्मान को बचाने की कोशिश कर रही है और यह तय करती है कि वह अब इस जगह पर नहीं रुकेगी। वह कहती है, “क्या गरीब होने का मतलब चोर होना है? नहीं, ऐसा नहीं है। मैं यह बर्दाश्त नहीं करूँगी।”

इस बीच, मि. सलूजा नाम का एक शख्स मन्नत के पास आता है और माफी माँगता है। वह कहता है कि यह सब रवीना की गलती थी, जिसने मन्नत पर गलत इल्ज़ाम लगाया। मि. सलूजा उसे समझाने की कोशिश करता है कि वह यहाँ रुके और कहीं न जाए। वह भावुक होकर कहता है, “तुम यहाँ रहोगी, मैं तुम्हारा ख्याल रखूँगा।” लेकिन मन्नत शुरू में उसकी बात मानने को तैयार नहीं होती।

फिर विक्रांत और अंकल बॉबी भी सीन में आते हैं। अंकल बॉबी भी मन्नत से माफी माँगते हैं और कहते हैं कि रवीना का स्वभाव ही ऐसा है, लेकिन वह उसकी ओर से माफी माँगने आए हैं। विक्रांत भी मन्नत को रोकने की कोशिश करता है और कहता है कि वे सबसे अच्छे दोस्त हैं। वह भावुक होकर कहता है, “अगर तुम चली गईं तो हमारी दोस्ती खत्म हो जाएगी।” मन्नत पहले तो जाने का फैसला करती है, लेकिन विक्रांत की बातों से उसका मन बदल जाता है और वह कहती है, “ठीक है, मैं नहीं जा रही। लेकिन यह मत कहना कि तुम मेरे लिए मायने नहीं रखते।”

इसके बाद कहानी में एक नया मोड़ आता है। मन्नत चुपके से मि. मनीष को फोन करती है और किराए का घर ढूंढने को कहती है। वह चाहती है कि जगह अच्छी और सुरक्षित हो, क्योंकि पिछली बार उसे परेशानी हुई थी। दूसरी तरफ, मि. सलूजा उसे पैसे वापस करने की बात कहता है। वह कहता है कि उसने मन्नत के लिए प्लेन टिकट, हेलिकॉप्टर राइड और हॉस्पिटल के बिल जैसे कई खर्चे उठाए हैं। वह सख्ती से कहता है, “मेरे सारे पैसे लौटा दो, फिर तुम जा सकती हो।” मन्नत इस बात से परेशान हो जाती है, लेकिन वह ठान लेती है कि वह सारे पैसे लौटाकर ही यहाँ से जाएगी।

कहानी में परिवार का तनाव भी दिखता है। नीतू अपने पति रोनी से शिकायत करती है कि विक्रांत ने सबके सामने उसकी बेइज्जती की और मन्नत का साथ दिया। रोनी उससे कहता है कि नीतू ने ही मन्नत पर गलत इल्ज़ाम लगाया था, इसलिए विक्रांत का गुस्सा जायज़ था। वहीं ऐश्वर्या बीच में आकर नीतू का पक्ष लेती है और कहती है कि हर माँ अपने बच्चे के लिए सबसे अच्छा चाहती है। लेकिन रोनी साफ कहता है कि किसी माँ को भी किसी बेगुनाह पर इल्ज़ाम लगाने का हक नहीं है।

इसके बाद मलिका और विक्रांत की दोस्ती भी सामने आती है। मलिका अपनी माँ से कहती है कि उसे विक्रांत का भरोसा जीतना है और इसके लिए उसे मन्नत की कीमत भी समझनी होगी। वह कहती है, “मुझे कम से कम दिखावा तो करना ही पड़ेगा।” मलिका की माँ उसकी तारीफ करती है और दोनों मिसेज बर्मन की बेटी की शादी में जाने की तैयारी करते हैं। लेकिन विक्रांत शादी में जाने के बजाय रेस्तराँ में मन्नत की मदद करने का फैसला करता है। वह कहता है, “मन्नत अकेले इतना काम कैसे करेगी? मैं रुकता हूँ।”

एपिसोड के अंत में मन्नत अपनी असली माँ सुनीता से मिलती है, लेकिन उसे साफ मना कर देती है। वह कहती है, “मेरी असली माँ श्रुति खन्ना हैं, जिन्होंने मुझे हर कदम पर संभाला। तुम मेरी माँ नहीं हो और कभी नहीं होगी।” वह सुनीता से सिर्फ एक मदद माँगती है – अगर उसका लीवर श्रुति से मैच करता है, तो वह उसकी जान बचाए। यह सीन बहुत भावुक है और मन्नत के आत्मसम्मान को दर्शाता है।


अंतर्दृष्टि (Insights)

इस एपिसोड से हमें कई बातें समझ आती हैं। मन्नत का किरदार दिखाता है कि गरीबी के बावजूद इंसान अपने सम्मान के लिए कितना कुछ कर सकता है। वह न सिर्फ अपने लिए, बल्कि अपनी माँ की इज्जत के लिए भी लड़ती है। विक्रांत की दोस्ती और मलिका की चालाकी से पता चलता है कि रिश्तों में सच्चाई और दिखावा दोनों चलते हैं। मि. सलूजा का पैसों को लेकर सख्त रवैया बताता है कि कुछ लोग हर चीज़ की कीमत लगाते हैं, फिर चाहे वह दोस्ती ही क्यों न हो। वहीं नीतू और रोनी का झगड़ा दिखाता है कि परिवार में गलतफहमियाँ कितनी आसानी से पैदा हो सकती हैं।

समीक्षा (Review)

यह एपिसोड भावनाओं और ड्रामे का शानदार मिश्रण है। मन्नत का किरदार बहुत मजबूत और प्रेरणादायक है, जो अपनी मुश्किलों के बावजूद हार नहीं मानता। विक्रांत की दोस्ती और उसका मन्नत के लिए स्टैंड लेना दिल को छू जाता है। मलिका का किरदार थोड़ा नकारात्मक है, जो अपनी चालाकी से कहानी में ट्विस्ट लाती है। मि. सलूजा का पैसों वाला एंगल थोड़ा सख्त लगा, लेकिन यह कहानी को वास्तविक बनाता है। नीतू और रोनी के बीच का तनाव भी परिवार की सच्चाई को सामने लाता है। कुल मिलाकर, यह एपिसोड आपको सोचने पर मजबूर करता है और अगले एपिसोड का इंतज़ार बढ़ा देता है।

सबसे अच्छा सीन (Best Scene)

सबसे अच्छा सीन वह है जब मन्नत अपनी असली माँ सुनीता से मिलती है और उसे साफ कह देती है, “तुम मेरी माँ नहीं हो। मेरी माँ श्रुति खन्ना हैं।” यह सीन बहुत भावुक है और मन्नत के आत्मसम्मान को बखूबी दिखाता है। उसका यह कहना कि वह सुनीता से सिर्फ अपनी माँ की जान बचाने की मदद चाहती है, यह दर्शाता है कि वह कितनी सच्ची और मजबूत है। इस सीन में उसकी आँखों का दर्द और आवाज़ की दृढ़ता कहानी को एक नया मोड़ देती है।

अगले एपिसोड का अनुमान

अगले एपिसोड में शायद मन्नत और विक्रांत की दोस्ती और गहरी होगी, लेकिन मलिका की चालाकी से कुछ नया तनाव पैदा हो सकता है। मि. सलूजा के पैसे वापस करने की बात आगे बढ़ सकती है और मन्नत को इसके लिए कोई बड़ा कदम उठाना पड़ सकता है। सुनीता का लीवर डोनेशन वाला फैसला भी कहानी में नया ड्रामा ला सकता है। मिसेज बर्मन की बेटी की शादी का जिक्र हुआ है, तो शायद वहाँ भी कोई बड़ा ट्विस्ट देखने को मिले। कुल मिलाकर, अगला एपिसोड और भी रोमांचक होने की उम्मीद है।

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